सहारनपुर में जो हुआ वह सामान्य नहीं था। अभी तो सावन भी चल रहा है और पावन रमजान का माह भी। प्रकाश पर्व भी तो अभी ही मनाया गया है। तो फिर इस प्रकार कि स्थिति निर्मित क्यों हुई। तीन लोगों की जान गई 50 लोग घायल हुए 100 से ज्यादा दुकाने जला दी गई...किसका नुकसान हुआ हमारा और सिर्फ हमारा। ना तो सरकार इसके लिए दोषी हो और नहीं समाज दोषी हम है जो हमेशा मुर्खों जैसी हरकत करते है। अगर इसी मसले पर शांति से बात हुई होती तो आज यह स्थिति निर्मित नहीं हुई होती। पर न हिन्दु मानने को तैयार हे न मुस्लिम अब नया मामला सिखों के साथ हो गया। कब आखिर कब सुधरेंगे हम। कब होगी चारों ओर शांति। या सिर्फ देश में इसी प्रकार चलता रहेगा। अंग्रेजों ने यह लड़ाई लगा दिए वे चले गये पर हम लड़ते रहे और लड़ रहे हैं। हम कभी याद नहीं करना चाहते उस लड़ाई को जब हम एक साथ उनसे लड़े और देश से उन्हें जाने को मजबुर कर दिए। आज हमें याद है तो सिर्फ कड़वाहट और सिर्फ कड़वाहट।
गुलामी के वक्त भले ही कलम से आजादी की लड़ाई लड़ी गई हो, लेकिन अब वह खुद गुलाम हो चुकी है। कार्पोरेट कंपनियां कलम के मालिक बन बैठे हैं। वहीं कुछ को सत्ता ने तो कुछ को विपक्ष ने खरीद लिया है। यह यूं नहीं हुआ, वक्त के साथ जब कलम कमजोर पड़ी तब ही Keyboard शक्तिशाली हुआ। फिर वह समय आ गया जब कलम दुकानों में बिकने लगी और उसी दुकान की शोभा बन बैठे Keyboard। साथ ही कलम की आजादी गुलामी में बदल गई। कलम के आजादी की लड़ाई आसान नहीं है, यह लड़ाई अब Keyboard से लड़नी होगी। पत्रकार
रविवार, 27 जुलाई 2014
शुक्रवार, 6 जून 2014
सामान्य नहीं हो सकती उत्तरप्रदेश की घटनाएं
उत्तरप्रदेश में इनदिनों जो कुछ हो रहा है वह सामान्य नहीं है। कहीं लड़कियों के साथ अनाचार के बाद पे़ड़ पर लटकाया जा रहा है तो कहीं उनके ऊपर तेजाब डाला जा रहा है। दिल्ली गैंग रेप के बाद बने नये कानून के बाद से इस प्रकार की घटऩाए जादा बड़ी है। खासकर अपराधियों द्वारा पीडिता को अपराध के बाद जींदा नहीं छोड़े जाने का कारण भी यही हो सकता है। इतना कठोर कानून बनने के बाद भी इस तरह की घटनाएं हो रही है जो निंदनीय है और किसी भी समाज के लिए मान्य नहीं हैं। इक और बात यह किसी भी सभ्य समाज में गंदगी फैलाने जैसा हो सकता है। सिर्फ उत्तर प्रदेश ही नहीं छत्तीसगढ़, दिल्ली, झारखण्ड, ओड़िशा, बिहार सहित कई राज्यों में इस प्रकार की घटनाएं हो रही है। उत्तरप्रदेश बड़ा राज्य है इसलिए यह ज्यादा प्रसिध्द हो रहा है। इससे पहले भी बलात्कार की घटनाएं हो रही थी और होती आ रही है जिसपर सिर्फ कानून से नहीं बल्कि मानसीकता परिवर्तन के साथ बदलाव किया जा सकता है। यह एक ऐसी विकृति है जिससे लोगो को निजात पाना हीं होगा। इसकी एक वजह खान पान और संगती भी है। जब तक हम अपने बच्चे की गलती को सुधारने के बजाए दंडीत करना शुरु नहीं करेेंगे वह ऐसी गलतियां करते रहेंगे। सोच में बदलाव की जरुरत है नहीं तो आने वाले समय में हर मां बाप यहीं चाहेंगे की उनके घर लड़की न हो। अगर लड़की नहीं हुई तो वह बहन कैसे बनेगी और अगर बहन नहीं बनी तो राखी कौन बाधेगा। इसके अलावा बहन होगी तभी तो जीजा जी मिलेंगे रिश्ता आगे बढ़ेगा। वह मां बनेगी भांजे भाजीयां होंगे इसके बीना तो हम मामा भी नहीं बन पाएंगे। सोच को बदलना होगा। सिर्फ उत्तरप्रदेश ही नहीं देश की जनता को अपने सोच में परिवर्तन लाना होगा। इतना ही नहीं मां बाप भी अपने बच्चों की शादी सही उम्र में करे ताकि इस प्रकार की घटनाओं से निजात पाया जा सके । कैरियर का शादी से कोई संबंध नहीं है इसलिए कैरियर के साथ कैरेक्टर भी अच्छा हो इसका भी खयाल रखा जाए। घटनाएं कम होगी और सभ्य समाज का उदय होगा।
सदस्यता लें
संदेश (Atom)
