जिला कोर्ट हो या हाईकोर्ट या फिर सुप्रीम कोर्ट यहां के जज कब मानेंगे कि वे सरकार की कठपुतली नहीं अपने आप में सुप्रीम कोर्ट होते हैं। उनके फैसले अपने आप में महत्वपूर्ण होते है। कुछ दिनों से देखने मिल रहा है कि सरकार जैसा संसोधन कर दिया बस जज उसे मान लिए। कितने विधिविधाई मंत्री एलएलबी या एलएलएम हैं। नहीं के बराबर इसके बाद भी उन्हें कानून मंत्री बना दिया जाता है। अब बोए पेड़ बबूल का तो आम कहा से होय वाली कहावत इसलिए चरितार्थ कर रहे हैं क्योंकि सोर्श के दम पर जज बन गए हैं तो जो सरकार चाहेगी वहीं करना होगा।
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